
Shri Krishna Janmotsav celebrations
मिसरोद के पाटीदार मांगलिक भवन में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
भोपाल. मिसरोद स्थित पाटीदार मांगलिक भवन में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के प्रसंग पर भाव-विभोर हो उठे। कथा वाचक आचार्य अतुल महाराज ने नरसिंह अवतार, भगवान श्रीराम के जन्म और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा का संगीतमय वर्णन किया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग आते ही पूरा कथा स्थल नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की… के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने नृत्य-गान कर खुशियां मनाईं और माखन-मिश्री का प्रसाद बांटा।
भोपाल. मिसरोद स्थित पाटीदार मांगलिक भवन में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के प्रसंग पर भाव-विभोर हो उठे। कथा वाचक आचार्य अतुल महाराज ने नरसिंह अवतार, भगवान श्रीराम के जन्म और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा का संगीतमय वर्णन किया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग आते ही पूरा कथा स्थल नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की… के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने नृत्य-गान कर खुशियां मनाईं और माखन-मिश्री का प्रसाद बांटा।
हिरण्यकशिपु के अत्याचार का अंत, प्रकट हुए नरसिंह भगवान
कथा के दौरान आचार्य अतुल महाराज ने भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की कथा सुनाते हुए भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि असुरराज हिरण्यकशिपु ने स्वयं को सर्वशक्तिमान मानते हुए भगवान विष्णु की भक्ति करने वाले अपने पुत्र प्रह्लाद को अनेक प्रकार से प्रताडि़त किया, लेकिन प्रह्लाद की आस्था नहीं डिगी। भगवान की सर्वव्यापकता सिद्ध करने हिरण्यकशिपु ने जब स्तंभ पर प्रहार किया, तब भगवान विष्णु नरसिंह रूप में प्रकट हुए और संध्या के समय, देहरी पर, अपने नखों से हिरण्यकशिपु का वध कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।
कथा के दौरान आचार्य अतुल महाराज ने भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की कथा सुनाते हुए भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि असुरराज हिरण्यकशिपु ने स्वयं को सर्वशक्तिमान मानते हुए भगवान विष्णु की भक्ति करने वाले अपने पुत्र प्रह्लाद को अनेक प्रकार से प्रताडि़त किया, लेकिन प्रह्लाद की आस्था नहीं डिगी। भगवान की सर्वव्यापकता सिद्ध करने हिरण्यकशिपु ने जब स्तंभ पर प्रहार किया, तब भगवान विष्णु नरसिंह रूप में प्रकट हुए और संध्या के समय, देहरी पर, अपने नखों से हिरण्यकशिपु का वध कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।

Shri Krishna Janmotsav celebrations
राम जन्मोत्सव ने भक्तों को किया भाव-विभोर
कथा वाचक ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। अयोध्या में राजा दशरथ के घर भगवान श्रीराम के जन्म के साथ ही उत्सव का वातावरण बनने और देवताओं द्वारा पुष्पवर्षा किए जाने का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भक्तिभाव में डूब गए। भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, मर्यादा और धर्म के प्रति समर्पण का वर्णन करते हुए आचार्य ने उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
कथा वाचक ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। अयोध्या में राजा दशरथ के घर भगवान श्रीराम के जन्म के साथ ही उत्सव का वातावरण बनने और देवताओं द्वारा पुष्पवर्षा किए जाने का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भक्तिभाव में डूब गए। भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, मर्यादा और धर्म के प्रति समर्पण का वर्णन करते हुए आचार्य ने उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
श्रीकृष्ण जन्म पर गूंजा जयकारा
कथा का मुख्य आकर्षण श्रीकृष्ण जन्मोत्सव रहा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आते ही कथा स्थल का माहौल उत्सव में बदल गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और भजनों पर नृत्य कर जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं। नंद बाबा के घर आनंद छाने, गोकुल में उत्सव मनने और बाल कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए आचार्य अतुल महाराज ने भक्तों को कृष्ण जन्म की आध्यात्मिक महत्ता बताई। जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं को माखन-मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया। कथा समापन के बाद महिलाओं ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। बुधवार को कथा श्रवण के लिए रामबाबू शर्मा, गिरीश शर्मा, पाटीदार समाज के महिला-पुरुष श्रद्धालुओं सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में रहवासी पहुंचे।
3 अक्टूबर तक चलेगी कथा
आयोजन से जुड़े गोपाल पाटीदार ने बताया कि संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 3 अक्टूबर तक प्रतिदिन किया जा रहा है। कथा का समय दोपहर 12.30 बजे से 3.30 बजे तक रखा गया है। कथा का आयोजन बाबूलाल जागीरदार, रमेशचंद्र जागीरदार, विष्णु प्रसाद जागीरदार, मनोहर जागीरदार सहित पाटीदार परिवार द्वारा किया जा रहा है।
आयोजन से जुड़े गोपाल पाटीदार ने बताया कि संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 3 अक्टूबर तक प्रतिदिन किया जा रहा है। कथा का समय दोपहर 12.30 बजे से 3.30 बजे तक रखा गया है। कथा का आयोजन बाबूलाल जागीरदार, रमेशचंद्र जागीरदार, विष्णु प्रसाद जागीरदार, मनोहर जागीरदार सहित पाटीदार परिवार द्वारा किया जा रहा है।
