मध्य प्रदेश

भेल में कोविड काल के ‘शहीद’ कर्मचारियों के परिवारों पर संकट, जून में खत्म हो जाएगी आर्थिक मदद

Families of BHEL employees who died during the Covid period are facing hardship, with financial assistance set to end in June

 सेवानिवृत्ति की आयु तक जारी रहे आश्रितों को मिलने वाली सहायता: हेम्टू इंटक
 मैनेजमेंट ने 5 साल के लिए लागू की थी योजना, स्कीम बंद होने से 39 परिवारों की आजीविका पर संकट
भोपाल. बीएचईएल (भेल) कारखाने के उन 39 परिवारों के लिए आने वाला साल बड़ी चुनौतियां लेकर आ सकता है, जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपने कमाऊ सदस्यों को खो दिया था। कोविड काल में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को दी जा रही आर्थिक सहायता जून 2026 में समाप्त होने वाली है। इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को लेकर हेम्टू इंटक यूनियन ने मोर्चा खोल दिया है।
यह था मामला
वर्ष 2020-21 में कोविड महामारी का प्रकोप पूरे विश्व में फैला हुआ था। इस दौरान भेल भोपाल कारखाने में लगभग 39 कर्मचारियों की मृत्यु हो गई थी। यह घटना बीएचईएल परिवार के लिए एक बड़ी त्रासदी थी। दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों की मदद के लिए भेल प्रबंधन द्वारा 5 वर्ष के लिए स्कीम लाई गई थी, जो जून 2026 में समाप्त हो रही है। इस स्कीम के बंद होने से प्रभावित परिवार को पुन: आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों की जिम्मेदारी भी हम सभी की है।
डायरेक्टर एचआर से हस्तक्षेप की मांग
यूनियन के अध्यक्ष राजेश शुक्ला के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने महाप्रबंधक (मानव संसाधन) टी.यू. सिंह से मुलाकात की। इस दौरान डायरेक्टर एचआर के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें मांग की गई है कि वर्तमान सहायता योजना को केवल 5 साल तक सीमित न रखकर, दिवंगत कर्मचारी की वास्तविक सेवानिवृत्ति की तिथि तक बहाल रखा जाए।
क्यों उठ रही है यह मांग
यूनियन ने प्रबंधन के सामने तर्क रखे हैं कि 2020-21 की वह त्रासदी बीएचईएल परिवार के लिए किसी काले अध्याय से कम नहीं थी।
अधूरी रह जाएगी मदद: वर्तमान स्कीम के तहत जून 2026 में सहायता बंद होने से इन परिवारों को फिर से गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ेगा।
बेहतर वित्तीय स्थिति: यूनियन का कहना है कि वर्तमान में बीएचईएल की वित्तीय स्थिति में सकारात्मक सुधार हुआ है, ऐसे में कंपनी इन परिवारों का बोझ उठाने में सक्षम है।
नैतिक जिम्मेदारी: राजेश शुक्ला ने स्पष्ट किया कि इन कर्मचारियों ने संकट के समय भी संस्थान की सेवा की, अत: उनके आश्रितों की पूरी जिम्मेदारी उठाना प्रबंधन का नैतिक कर्तव्य है।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
ज्ञापन सौंपने के दौरान कोषाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी, सी.आर. नामदेव, धर्मेन्द्र अवस्थी और सतेंद्र शर्मा मौजूद रहे। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि इस संवेदनशील विषय पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे इस मांग को व्यापक स्तर पर उठाएंगे।
वर्जन
कोविड के दौरान जान गंवाने वाले हमारे साथी कोई आंकड़ा मात्र नहीं थे, वे भेल परिवार के अभिन्न अंग थे। 5 साल की मदद काफी नहीं है। जब तक कर्मचारी की रिटायरमेंट उम्र नहीं हो जाती, तब तक उनके परिवार को वेतन के समान आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।
राजेश शुक्ला, अध्यक्ष, हेम्टू इंटक

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