जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भोपाल व संस्था आवाज का संयुक्त आयोजन
बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों और पैरा लीगल वालंटियर्स की एक दिवसीय कार्यशाला
भोपाल. पोक्सो अधिनियम बच्चों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त कानूनी व्यवस्था है, किन्तु इसकी वास्तविक प्रभावशीलता तभी संभव है, जब इसे लागू करने वाले अधिकारी और स्वयंसेवक कानून की बारीकियों को समझते हुए पीडि़त बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएं। यह बात जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भोपाल के सचिव एवं न्यायाधीश सुनीत अग्रवाल ने शनिवार को राजधानी के एम.पी. नगर स्थित एक निजी होटल में आयोजित बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों और पैरा लीगल वालंटियर्स की एक दिवसीय संयुक्त प्रशिक्षण कार्यशाला के शुभारम्भ अवसर पर कही। कार्यशाला का संयुक्त आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भोपाल और बच्चों के साथ काम कर रही संस्था आवाज के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

POCSO Act is effective only if implemented with sensitivity: Suneet Agarwal
53 प्रतिशत से अधिक बच्चे लैंगिक शोषण का शिकार
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना तथा बाल लैंगिक शोषण के प्रकरणों में त्वरित, संवेदनशील एवं विधिसम्मत कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों की क्षमता को सुदृढ़ करना था। कार्यशाला के दौरान आवाज संस्था के निदेशक प्रशांत दुबे ने बाल लैंगिक शोषण से जुड़े गंभीर तथ्यों को साझा करते हुए बताया कि 53 प्रतिशत से अधिक बच्चे किसी न किसी रूप में लैंगिक शोषण का सामना कर चुके हैं, जिनमें लडक़ों की संख्या भी उल्लेखनीय है। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकांश मामलों में शोषणकर्ता परिचित या परिवार का सदस्य होता है, जिससे ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और सतर्कता और अधिक आवश्यक हो जाती है।

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विशेष न्यायालय की भूमिका पर डाला प्रकाश
दुबे ने पोक्सो अधिनियम की पृष्ठभूमि, उसकी प्रमुख धाराओं, रिपोर्टिंग प्रक्रिया, धारा 39 के पालन, पीडि़त बच्चों के बयान दर्ज करने की विधि, पहचान की गोपनीयता तथा विशेष न्यायालय की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि बाल लैंगिक शोषण के मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि पीडि़त बच्चों के मानसिक एवं भावनात्मक पुनर्वास के लिए “सपोर्ट पर्सन” की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जिसकी नियुक्ति बाल कल्याण समिति द्वारा की जाती है।
बाल पीडि़तों के पुनर्वास पर की चर्चा
कार्यशाला में बाल कल्याण समिति भोपाल के अध्यक्ष धनीराम सिंह पवार, सदस्य मेखला श्रीवास्तव, वर्षा मीणा और अलंकार जैन ने भी सहभागिता करते हुए बाल पीडि़तों के पुनर्वास, समिति की भूमिका तथा पुलिस एवं बाल कल्याण समिति के बीच समन्वय के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने प्रारूप ‘क’ और ‘ख’ को सही तरीके से भरने की प्रक्रिया पर भी मार्गदर्शन दिया।
पुलिस अधिकारी, पैरा लीगल वालंटियर्स ने साझा किए अनुभव
कार्यशाला में पुलिस अधिकारी और पैरा लीगल वालंटियर्स ने अपने अनुभव साझा किए तथा अधिनियम से संबंधित व्यावहारिक प्रश्नों पर चर्चा की। सभी प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताया और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता जताई। आयोजनकर्ताओं ने बाल संरक्षण के क्षेत्र में सतत क्षमता निर्माण और जागरुकता बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम में आवाज संस्था की काशिफा मंसूरी, शिखा श्रीवास्तव, पवनरेखा बिसेन, रूपेश वर्मा और रोली शिवहरे मौजूद रहीं।
